समुद्र के बीचों-बीच तेज रफ्तार से भागती एक संदिग्ध नाव और आसमान से बरसती मिसाइल। अमेरिकी सेना ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। इस सैन्य हमले में नाव पर सवार दो संदिग्ध नार्को-आतंकियों की मौत हो गई। अमेरिकी साउदर्न कमांड (SOUTHCOM) के मुताबिक यह बोट नार्को-ट्रैफिकिंग नेटवर्क का हिस्सा थी। धमाका इतना जोरदार था कि नाव के चीथड़े उड़ गए और उस पर लदा भारी मात्रा में ड्रग्स पानी में बह गया।
यह कोई अकेली घटना नहीं है। अमेरिकी प्रशासन पिछले कुछ महीनों से 'ऑपरेशन सदर्न स्पियर' (Operation Southern Spear) के तहत कैरिबियन सागर और पूर्वी प्रशांत महासागर में संदिग्ध ड्रग्स नावों को सीधे निशाना बना रहा है। लेकिन इस कार्रवाई ने अब पूरी दुनिया में एक नई बहस छेड़ दी है। क्या सिर्फ शक के आधार पर समुद्र में नावों को बम से उड़ा देना अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत सही है?
अमेरिकी सेना की नई रणनीति और घातक हमले
पुराने दिनों में जब अमेरिकी कोस्ट गार्ड या नौसेना किसी संदिग्ध ड्रग्स बोट को देखती थी, तो उसे घेरकर तस्करों को गिरफ्तार किया जाता था। नशीले पदार्थों को जब्त करके कोर्ट में सबूत के तौर पर पेश किया जाता था। अब ऐसा नहीं हो रहा। अमेरिकी सेना अब सीधे आसमान से मिसाइल दाग रही है या ड्रोन हमले कर रही है।
इस ताजा कार्रवाई में भी यही हुआ। अमेरिकी रक्षा अधिकारियों का कहना है कि संदिग्ध नाव को रुकने का इशारा किया गया था। जब तस्करों ने नाव की रफ्तार बढ़ा दी, तो उस पर घातक हमला कर दिया गया। अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि ये लोग साधारण ड्रग पैडलर नहीं बल्कि खतरनाक नार्को-आतंकी थे, जो अमेरिकी नागरिकों की जान को खतरे में डाल रहे हैं।
- हवाई कार्रवाई: रीपर ड्रोन और लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल।
- कोई गिरफ्तारी नहीं: सीधे मौके पर ही खात्मा।
- सबूतों का नष्ट होना: ड्रग्स पानी में बहने के कारण ऑन-रिकॉर्ड् जब्तियां कम।
क्या बह गया ड्रग्स या मिट गए सबूत
अमेरिकी सेना ने हमले का वीडियो जारी किया है जिसमें नाव आग के गोले में तब्दील होती दिख रही है। सेना का कहना है कि नाव पर करोड़ों डॉलर का कोकीन या सिंथेटिक ड्रग्स लदा था जो ब्लास्ट के बाद समुद्र के पानी में बर्बाद हो गया।
पर यहां एक बड़ा पेंच है। आलोचकों और मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि जब नाव को सीधे उड़ा दिया गया, तो यह कैसे साबित होगा कि उसमें सच में ड्रग्स ही था? कोई स्वतंत्र जांच एजेंसी वहां मौजूद नहीं होती। अमेरिकी सेना की इस आक्रामक नीति के तहत पिछले कुछ महीनों में 200 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं। कई मामलों में पड़ोसी देशों ने आरोप लगाया है कि अमेरिकी सेना बिना पुख्ता सबूत के छोटे मछुआरों या साधारण जहाजों को भी निशाना बना रही है।
नार्को टेररिज्म के खिलाफ अमेरिका का सख्त रुख
वाशिंगटन का रुख इस मामले पर बिल्कुल साफ और बेहद आक्रामक है। अमेरिकी सरकार का मानना है कि लैटिन अमेरिकी देशों के ड्रग कार्टेल अब सिर्फ तस्करी नहीं कर रहे, बल्कि वे आतंकी संगठनों की तरह काम कर रहे हैं। फेंटानिल और कोकीन जैसी नशीली दवाओं की वजह से हर साल हजारों अमेरिकी नागरिकों की मौत हो रही है। इसी वजह से अमेरिकी प्रशासन ने इन कार्टेल्स के खिलाफ 'सशस्त्र संघर्ष' (Armed Conflict) का एलान कर रखा है।
अमेरिकी रक्षा सचिव का कहना है कि अगर आप अमेरिका में जहर भेजने वाले जहाजों पर सवार हैं, तो आप अमेरिकी सेना के वैध टारगेट हैं। सरकार का साफ संदेश है कि तस्करों को सरेंडर करने का मौका देने के बजाय उनके रूट्स को पूरी तरह से तबाह कर दिया जाए।
इस सैन्य कार्रवाई के कानूनी और कूटनीतिक खतरे
इस तरह की सीधी मिलिट्री स्ट्राइक ने अंतरराष्ट्रीय कानून के जानकारों को चिंता में डाल दिया है। समुद्र के अपने कानून होते हैं जिन्हें 'लॉ ऑफ द सी' कहा जाता है। किसी भी संदिग्ध जहाज को पकड़ने के लिए एक तय प्रक्रिया का पालन करना होता है।
सबसे बड़ी समस्या यह है कि लैटिन अमेरिकी देश जैसे वेनेजुएला और कोलंबिया इस अमेरिकी दखलअंदाजी का कड़ा विरोध कर रहे हैं। वे इसे अपनी संप्रभुता पर हमला मानते हैं। कई बार अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की कंक्रीट रिपोर्ट भी गलत साबित हो जाती हैं। हाल ही में एक जमीनी कार्रवाई में ड्रग्स कैंप समझकर जिस जगह पर बमबारी की गई थी, वह बाद में एक साधारण डेयरी फार्म निकला। ऐसे में समुद्र के बीचों-बीच बिना जांच के की जा रही ये एयरस्ट्राइक किसी बड़े कूटनीतिक विवाद को जन्म दे सकती हैं।
अगर आप इस पूरे घटनाक्रम को समझना चाहते हैं, तो आपको ग्लोबल ड्रग सप्लाई चेन और अमेरिकी डिफेंस पॉलिसी पर लगातार नजर रखनी होगी। समुद्री सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से जुड़ी ऐसी ही सटीक और निष्पक्ष खबरों के लिए हमारे प्लेटफॉर्म को फॉलो करें और अपनी राय नीचे कमेंट सेक्शन में साझा करें।